22

Jun

ये वही कमरा है
जहाँ तुम्हारी बातो का शोर था
साथ गुजारे लम्हें खिलखिलाते थे
जाने कितने वादों का इकलौता गवाह
जाने कितने रूठने मनाने वाले पल का हमसफर
हंसी ठहाको के शोर से सराबोर ये कमरा
आज बिखरी कुछ यादो को समेटता
वीराने के गीत सुनाता
कभी उदास तबियत हो तो चले आना

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