22
Jun
बस साथ निभाने की जो कसमें दिलाई गई थी
उसका बोझ है पर प्रेम नहीं है
अब यदि वो प्रेम की बात भी कर रहे है
तो वो इसलिए कि मजबूरी है
कि पति पत्नी है
गहराई में जाकर देखा जाय
तो वो सामाजिक बंधन ही मिलेगा
एक खानापूर्ति है कि साथ में जीवन काटना है
जबकि साथ में जीवन जीना होता है काटना नहीं


