21

Jun

मुस्कान को तमीज चाहिए

आंसुओ को तन्हाई

अकेला पन जब काटने लगा

तो बचपन की याद आई

भीड़ बहुत है आसपास सबके

पकड़े है कोई न कोई हाथ भी

दिल ने जब सुकून चाहा

याद मां की गोद ही आई

हां खुश हूं में कहता है हर कोई

हंसी झूठी चेहरे पे सजा के

जो मुस्कुराना आंसुओ ने चाहा

पापा की डांट ही याद आई

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