21

Jun

और फिर मैने उसे जाने दिया.....
मैंने सदिया बिताई थी उसकी प्रतीक्षा मे... दिन को दोपहर, दोपहर को शाम ,
शाम को रात , रात को दिन होने में युग लग जाते हैं ये मैने सिर्फ जाना ,
नहीं जीया है...... घडी के काटे घूमते रहे, कॅलेंडर के पन्ने बदलते गये पर वक्त मानो थम सा गाया था...

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