20
Jun
मायूस भी नहीं है वो और खुश भी नहीं है,
क्या बात है जो दिल को मजधार में ले आई..
रफ़्ता रफ़्ता खत्म हुए हम जो तेरे इश्क़ में
अफसोस है कि मौत क्यों इक बार में न आई..
तुझे गैरों के साथ देखकर रोये थे जितना हम
इतनी तो रूलाई तुम्हारी याद में न आई..!!


