19
Jun
दिल पर तो बहुत ज़ख़्म ज़माने के लगे हैं
ख़ुद-दारी से लेकिन कभी रोया नहीं जाता
पहरे मिरे होंटों पे लगा रक्खे हैं उस ने
चाहूँ मैं गिला करना तो बोला नहीं जाता
~ अज़हर नय्यर
Jun
दिल पर तो बहुत ज़ख़्म ज़माने के लगे हैं
ख़ुद-दारी से लेकिन कभी रोया नहीं जाता
पहरे मिरे होंटों पे लगा रक्खे हैं उस ने
चाहूँ मैं गिला करना तो बोला नहीं जाता
~ अज़हर नय्यर