28

Jun

आज की सुबह खास है 
बादल का वो टुकड़ा बारिश के साथ
तेरी यादों की फुहार भी लाया है
मैं खुद को आज सींचूँगी
मन में बसी विरह की तपिश
को इन गिली बूंदो से

कुछ नयी कलियाँ
कुछ नये सपने
कुछ नये से तुम
खिल के मेरे सीने में
फिर से बहार ले आओगे

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