20

Jun

खुद से बेखबर हूं
पता नही मैं कौन हूं

दर्द है ज्यादा
फिर भी मौन हूं

इधर उधर मैं
गलियों में फिरता हूं

कोई पूछले गर इकबार
की मैं कौन हूं

कह दूंगा ..
खुद की तलाश में हूं
भटकता मैं कोई राही

दीन दुनिया से भी बेखबर हूं
शायद इसलिए ही मैं अब मौन हूं!

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