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Feb
नज़रों से गुनगुना कर कोई धुन तराशते हैं जो अनजाने चेहरों में खुशियाँ तलाशते हैं अपनों में तो बस जिन्हें ऐब ही दिखते हैं वो गैरों की खातिर बेकीमत बिकते हैं....
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नज़रों से गुनगुना कर कोई धुन तराशते हैं जो अनजाने चेहरों में खुशियाँ तलाशते हैं अपनों में तो बस जिन्हें ऐब ही दिखते हैं वो गैरों की खातिर बेकीमत बिकते हैं....