8

Dec

गालों पर उंगलियों की छाप
पीठ पर लात जूतों की बरसात

होंठों पर दाँतों के निशान
मुख की कोरों से बहता रक्त

कानों में गूँजती 
रिश्तों को शर्मशार करती 
हुईं गालियाँ
'उन दिनों'.
उसकी टाँगों के नीचे
आने से मैंने मना क्या कर दिया
बस.. 
उसने एक चुटकी सिन्दूर की कीमत 
इस तरह से वसूल कर ली

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