22
Aug
तेरे होंठों के स्पर्श से मेरा हर ज़ख़्म भर जाता, भींच कर बाहों में तेरी फूंक से भाप करवाता, और हम भी कसीदे इश़्क़ के आंखों से पढ़ लेते, मयस्सर जो तू होती तो तेरा दर्द भी हंसकर पी जाता..!! विरक्ति
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तेरे होंठों के स्पर्श से मेरा हर ज़ख़्म भर जाता, भींच कर बाहों में तेरी फूंक से भाप करवाता, और हम भी कसीदे इश़्क़ के आंखों से पढ़ लेते, मयस्सर जो तू होती तो तेरा दर्द भी हंसकर पी जाता..!! विरक्ति