18
Aug
काश हमारे प्यार की नैया भी कबूतर पार लगाता, तुम्हारा पैगाम अपने पैरो से मुझ तक पहुंचाता, ख्वाब सात जन्मो के हम भी देख लेते तुम्हारे साथ, अगर मुकद्दर को होता मंजूर तो तुमसे मिलवाता, और हम भी महका देते कमरे को गुलाब के इत्र से, अगर तू महक मेरी वफाओं कि पहचान पाता..!! विरक्ति


