8

Aug

अरे नासमझ है, नादान है, वो मन कि कच्ची हैं अभी,
पढ़ ना सकी कसीदे मेरे इश़्क़ के, शायद वो बच्ची हैं अभी..!!

विरक्ति

Share this post


RELATED

Posts

Translate »