8

Aug

कुछ बादलों की सी
है फितरत उनकी
छाते है मेरी छत पर
बरस कहीं और जाते है

बांट कर वक्त अपना
महफिल में गैरों की
बहानों भरे कुछ पल
हमको थमा देते है

रहूं हर पल उनके साथ
इस हसरत से वो
दिल में मेरी तस्वीर 
बना कर रखते है

जानते है वो कि हम
शिकायत नही करते 
इसी का फायदा
सता कर उठाते है

Share this post


RELATED

Posts

Translate »