10

Aug

लहू में घरौंदा कर के
अहसास बैठे थे
नस नस से उभर कर
वो आज
तूलिका के द्वार से
फलक पर उतर रहे हैं
लोग ये समझ रहे हैं
मैं तेरी #तस्वीर बना रहा हूं
हकीकत में तो मैं
तूलिका की आंखों से
तुझे देख रहा हूं.... 
मैं कहां #तस्वीर बना रहा हूं ❓

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