18
Jul
बड़ा एहसान हम फ़रमा रहे हैं कि उन के ख़त उन्हें लौटा रहे हैं किसी सूरत उन्हें नफ़रत हो हम से हम अपने ऐब ख़ुद गिनवा रहे हैं वो पागल मस्त है अपनी वफ़ा में मिरी आँखों में आँसू आ रहे हैं अजब कुछ रब्त है तुम से कि तुम को हम अपना जान कर ठुकरा रहे हैं जौन एलिया


