14

Jul

मैं नहीं कहता मुझे औरों से बेहतर चाहिए 
मुझ को जितनी है ज़रूरत उतनी चादर चाहिए 

हैं परेशाँ इस लिए भी लोग अपनी प्यास से 
प्यास की ख़ातिर सभी को इक समुंदर चाहिए 

मुद्दतों भटके हैं मेरे ख़्वाब सारे दर-ब-दर 
बे-घरों को सर छुपाने के लिए घर चाहिए 

घूमना फिरना अगर होता तो दुनिया है पड़ी 
इक जगह रहने को तेरे दिल के अंदर चाहिए 

इश्क़ में दिल की अमीरी काम आती है मगर 
वो मोहब्बत क्या करेंगे जिन को गौहर चाहिए 

चार दिन की चाँदनी से ज़िंदगी कटती नहीं 
चाँदनी तो हम सभी को ज़िंदगी भर चाहिए 

ये कहाँ की रीत है जब मन किया तो मिल लिए 
चाहिए तेरी मोहब्बत और अक्सर चाहिए 

राघवेंद्र द्विवेदी

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