13

Jul

दर्पण देख सँवर गए कितने 
अपने पर ही मर गए कितने 

ख़्वाबों की खेती को सच के 
कीट-पतंगे चर गए कितने 

प्यार वफ़ा ईमान की बातें 
करके लोग मुकर गए कितने 

फ़ाइलें सब्ज़ योजनाओं की 
चूहे रोज़ कुतर गए कितने 

कुर्सी सगी हुई कब किसकी 
बैठे और उतर गए कितने 

मालविका हरिओम 

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