13

Jul

मुकम्मल नहीं हुआ "इश़्क़",
इसलिए आज "शायर" बना बैठा हूं,

अपने कल के "हालातों" से हार कर,
मैं आज "कायर" बना बैठा हूं,

और हर "कसौटी" पर खरी उतरी वो,
तो "मोहब्बत" को क्या दोष देते,

मैं खुद "मुकद्दर" से चोट खा कर,
आज यहां "अधमरा" बैठा हूं..!!

#विरक्ति

Share this post


RELATED

Posts

Translate »