हार मंज़ूर है मुझे, मगर एहसान नहीं, तुम जीत के भी, मेरे कर्ज़ दार रहोगे....!!
जब रात है ऐसी मतवाली
फिर सुबह का आलम क्या होगा….
खरीद लूं खुशियां सारी ऐसी इच्छाएं पलती हैं,
ना ख्वाब पूरे होते हैं ना ही तक़दीर बदलती है..!!
टूटे ख़्वाब टूटी उम्मीदें
अक्सर दर्द बड़ा देतीं हैं
ज़ख्म नज़र नहीं आता मगर
दिल चीर के रख देतीं हैं
मासिक वेतन पूरनमासी का चाँद है जो एक दिन दिखाई देता है और घटते घटते लुप्त हो जाता है।
मुंशी प्रेमचंद
मुझे मालुम नही, ईद कैसे मनाया जाय,मैं गैर मुस्लिम हूं, बधाई कबुल करना ...
सफेद कपड़े पहन कर लोग काम काले करते की,धर्म के चोले में नेता हैवानियत की साँस भरते हैं.
ता उम्र के लिएं हाथ थामना होता है,ए पल दो पल का खेल नहीं होता...
मूर्ख से बहस करना गाल पर बैठे मच्छर को मारने जैसा है,
मच्छर मरे या ना मरे पर आपको थप्पड़ ज़रूर लगेगा।
भूमि और भाग्य का
एक ही स्वभाव है..!
जो भी बोया है..
वो निकलना तय है..!!
कोई घूंघट कोई मुखौटा तो कोई नकाब में हैसच कहे तो यहां कांटे भी हर गुलाब में हैं
दाँव पर सब कुछ लगा है, रुक नहीं सकते
टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते
अटल बिहारी वाजपेयी
✯||करबटे बदलती हैं बोशामें.उस चांद के इंतेजार मैं…||✯
शेर की तरह ज़िन्दगी जियो,
चाहे कर्म करो या कांड करो।
चक्रव्यूह रचने वाले सारे अपने ही होते हैं , कल भी यही सच था और आज भी यही सच है ...
बाज के हौसले में फर्क है,
वरना उड़ान कौवे भी भरते हैं।
दुःख देखिएहम सब अकेले हैंफिर भी हमारे पास समय नहीं हैकिसी अकेले के लिए।
न्यूज़ देख रहा था
ना मुझे इजराइल से बैर है
ना फलीस्तीन से मोहब्बत
दोनो तरफ से मरने वालों की
संख्या बताई जा रही थी
जिसमे औरते मर्द मासूम थे
टूटते घर थे
कुछ लाशें थी
कहीं आग लगी थी
कहीं रुदन था...
अभी मत दीजियो ज़वाब के मैं
झूम तो लूँ सवाल पर अपने
हज़रत जौन एलिया
कुछ सांपों से इतने गहरे रिश्ते हैं के ,
उनसे खुद को खुद डसवाना पड़ता है