World's Best Cow Hospital

सुनोतस्वीर मेंतुम्हें देखनातुम्हें याद करनातुम्हें महसूस करनाऔर हर पल यह सोचनाकि तुम होती तो ऐसा होताग़र जो तुम होती तो वैसा होताहाय! सब कुछ कितना प्यारा होताकितना, कितना, कितना ही सुन्दर होता…

चार दिन की जिंदगीकुछ भी गिला न कीजिये,दवा, जाम, इश्क़, जहर जो मिले मजा लीजिये

बादलों को गुरुर था कि वो उच्चाई पे है,जब बारिश हुई तो उसे ज़मीन की मिट्टी ही रास आयी।

हमारे खून से पाई है तुमने आजादी, हमीं से पूछते हो तुम हमारा हक़ क्या हैं...

यदि आपके पास कोई समस्या आती है तो उसका समाधान खोजें उससे दूर नहीं भागे !

दुख, फरेब, गरीबी और बदनसीबी को मापना सिखाता हूं, अपनी कलम कि धार से, मैं समाज को आईना दिखाता हूं..

सबका ख़ुशी से फासला एक कदम हैं ,हर घर में बस एक ही कमरा कम हैं .. ~ जावेद अख्तर

कुछ सपनों के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करता है।

अगर हमे छोड़कर वो खुश है, तो शिकायत कैसी, अब हम उन्हें खुशी भी न दे, तो महोब्बत कैसी...

दुनिया इतनी तेजी से बदल रही है कि अगर तुम किसी एक ही नजरिए का दामन थामे रहोगे, तो आगे नहीं बढ़ सकते।

स्त्रीतत्व को छूना भी एक कला है,स्त्री काया नहीं हृदय है..

राम तुम्हारे युग का रावन अच्छा था... दस के दस चेहरे सब बाहर रखता था... प्रताप सोमवंशी

चराग़ों को आँखों में महफ़ूज़ रखना बड़ी दूर तक रात ही रात होगी

मुंह पर बोलूं तो खटकता हूं लोगो को, चुप रहू तो अन्दर की बगावत मार देती है।

हम जो आपसे मिले है इत्तेफाक थोड़ी है, मिल कर तुमको छोड़ दे मज़ाक थोड़ी है।

जून कीझुलसती गर्मी के मध्य भी जो तुम आ जाओपीपल की घनीछांव के नीचेहम तुम दशहरी आम चखेंगे

गिरता न कभी चेतक तन परराणाप्रताप का कोड़ा थावह दौड़ रहा अरिमस्तक परवह आसमान का घोड़ा था था यहीं रहा अब यहाँ नहींवह वहीं रहा था यहाँ नहींथी जगह न कोई जहाँ नहींकिस अरिमस्तक पर कहाँ नहीं

गुज़रो जो बाग़ से तो दुआ माँगते चलो जिसमें खिले हैं फूल वो डाली हरी रहे

ना में बदला ना मेरा किरदार बदला ना अंदाज बदला ना मिजाज बदला,,,, चन्द सिक्के ही तो कम हुवे थे जेब मे दुनिया के देखने का सलीका बदल गया

अजीब अदा है लोगों की ... नजरें भी हम पर और नाराजगी भी हमीं से...!


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