खुदा से कहां कुछ छिपा है कभी मोहतरमा,मैं तुमसे दूर हुआ इसमें भी रजा उसी की थी..!!

क्या उस गली में कभी तेरा जाना हुआजहाँ से ज़माने को गुज़रे ज़माना हुआमेरा समय तो वहीं पे है ठहरा हुआबताऊँ तुम्हें क्या मेरे साथ क्या-क्या हुआम्म हम्म, खामोशियाँ एक साज़ हैंतुम धुन कोई लाओ ज़रा….

जैसे ही जमाना बदलालोग बदलने लग गये,अब कोई दिल्लगी नहीं करतासबको चाहिए बस कोईवक्त बिताने के लिये…

हजारों की भीड़ में भी पहचान लेते हैं,पापा कुछ कहे बिना ही सब जान लेते हैं..!!

तमन्ना है की हर तमन्ना में तू रहे…. तुझमें मैं रहूं और मुझमें हमेशा तू रहे

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