जब चली थी ख़ुद को ढूंढने, नही जानती थी, कि अपने आप को दूसरो में, नही खोजा करते।

लिखते क्यों नहीं मुझे फिर दोबारा फिर एक बार मुझे अधूरा होना है !

मैंने अपनी ज़िंदगी के सारे, महंगें सबक सस्ते लोगों से सीखे हैं...

वक्त ऐसे ना दिया करो कि मुझे भीख लगे , बाकी इसके आगे वही करो जो तुम्हें ठीक लगे ..!!

आवाज लगाने पर तो जमाना सुन लेता है... जो ख़ामोशी सुने उसे मोहब्बत कहते हैं...!!

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