तू सच बोलने का इरादा तो कर, बिरह काटने का हौसला है मुझ में.
तन को सौ बंदिशें , मन को लगी न रोक तन की दो गज कोठरी , मन के तीनों लोक !!
उसने हमें छोड़ा शायद कदर नहीं थी इश़्क़ की, हम अपनी वफाओं के बादशाह तो आज भी हैं..!!
संभलना था हमें,, साथ फिसलते चले गए,, ना चाहा फिर भी,, उसकी चाहत में संवरते चले गए,, अंज़ाम मालूम था,, फिर भी आगे बढ़ते चले गए,, तिनका तिनका जोड़ा था ख़ुद को,, दूरियों में बिखरते चले गए,, अब तकलीफ़ ये...
जिंदगी भर किसी का साथ चाहिए तो सुनो, मोहब्बत से अधिक उसकी जरूरत बनें रहो !