तुम हाथ थाम लेते होमैं चल पड़ती हूँ
तुम नज़र भर देखते होमैं मुस्कुरा देती हूँ
तुम क़रीब आ जाते होमैं शरमा जाती हूँ
तुम आग़ोश में भरते होमैं सिमट जाती हूँ
तुम माथे को चूम लेते होमैं समर्पित हो जाती हूँ
ग़ैरों की बात छोड़िए, ग़ैरों से क्या गिलाअपनों ने क्या दिया हमें, अपनों से क्या मिला।
~ कैफ़ी आज़मी
जिसे समझो कि मोहब्बत का कदरदान है,वही हर चौराहे पर दिल नीलाम किये बैठा है..!!
लोग तोल देते हैं चंद बातों पर क़िरदार…बारी अपनी हो तो तराजू नहीं मिलता!!
तुम क्या जानो क्या चाहा था क्या लेकर आये हमटूटे सपने घायल नगमे कुछ शोले कुछ शबनम