न मैं शायर हूँ न मेरा कोई शायरी से वास्ता , बस एक आदत सी हो गई उसकी यादों को बयान करना ..!!

वक़्त को समझना, समझदारी है,वक़्त पर समझना, जिम्मेदारी है…!!

अब मुझे अकेले रहना आ गया है,आप अपने वक़्त का अचार डाल लीजिए...

ख़ुद को ले आए है इस मक़ाम पर हम,अब दिल को कुछ भी बुरा नहीं लगता.

रोम जल रहा था और नीरो बांसुरी बजा रहा था

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