ख़्वाहिश है कि ख़ुद को भी कभी दूर से देखूँ !मंज़र का नज़ारा करूँ मंज़र से निकल कर !!

हमेशा सही के साथ खड़े रहो,भले ही अकेला क्यों ना रहना पड़े…

किसी को बीच सफर में छोड़ने वालों ,तुम्हें मंजिल नहीं नसीब होगी आजमाना उसकी वफ़ा के बाद गैरों को,देखना….तुम्हें फिर वो, मोहब्बत नहीं नसीब होगी…!!

बहुत महंगे होते है सावले लोग,यहां हर किसी की पसन्द नहीं बनते !

कुछ अच्छे दोस्त भी बना लेना ज़िंदगी मे…महोब्बत हर वक्त साथ नही देती..!!

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