ये जो तुम कहते हो कोई नहीं अपना,कभी ख़ुद से पूछो क्या तुम किसी के हो पाये.

जीवन बड़ा नीरस सा हो गया है,वापसी कि आस तेरी अब भी है.

दुख की शाम हो या सुख का सवेरा…सब कुछ कबूल है अगर…"साथ हो तेरा"…!!

जिसे कोई नहीं सुधार पता,उसे वक्त सुधार देता है…

अंतर्मन में संघर्ष….फ़िर भी चेहरे पर मुस्कुराहट, यही जीवन का श्रेष्ठ अभिनय है..!!

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