सोचा थाघरबना कर बैठूँगासुकून सेपर घर की ज़रूरतों नेमुसाफ़िर बना दिया ~ गुलज़ार

उन्होंने कहा चाय में चीनी कितना डालू,मैंने बोला बस आपने छु लिया चाय मिठी हो गयी।

किसी बद्दुआ की गिरफ्त में हूँ,मुझे मेरे हक की मोहब्बत नहीं मिलती.

मुस्कुराना इतना भी मुश्किल नहीं हैंबस तुम्हारे बारे में सोचना ही तो है !!

लफ्ज़ भुलाए जा सकते हैं,लहज़ा घर कर जाता है…

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