मोहब्बत वो बेइंतहा करता है मुझसे सोकरता है ख़ुद बुराई , बता कर बुरा मुझे …

कांटों को मत निकाल चमन से ओ बाग़वाये भी गुलों के साथ पले हैं बहार में 🎼

व्यर्थ का तक़ल्लुफ़ क्यों किसी से निभाना..जहाँ दिल न मिले वहाँ हाथ क्यों मिलना..!!

कोई ये कैसे बताए कि वो तन्हा क्यूँ हैवो जो अपना था वही और किसी का क्यूँ हैयही दुनिया है तो फिर ऐसी ये दुनिया क्यूँ हैयही होता है तो आख़िर यही होता क्यूँ है -कैफ़ी आज़मी

मेरे सपने में भी कभी ऐसा संयोग नहीं होताकोशिश करता हूं, पर मुझसे योग नहीं होता।

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