दिमाग सबके पास है चालाकी करनी है या……...ईमानदारी वे संस्कारों पर निर्भर करता है…..!!

रंग बदलती इस दुनिया मेंमैंने उसको पाक लिखा,वो छू लो पारस हो जाऊंअब तक ख़ुद को ख़ाक लिखा…

ज़र्द चेहरों की किताबें भी हैं कितनी मक़्बूल… तर्जुमे उन के जहाँ भर की ज़बानों में मिले…

कुछ नहीं था बेचने को ,अपने दिल के ख्वाब बेचे हैं...

मुमकिन नहीं मेरा पहले जैसा हो पाना खुद को बहुत पीछे छोड़ आई हूँ मैं

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