चांद के टेढ़े स्वरुप ने भी हमेशा प्रेमियों को सीधा प्रेम मार्ग दिखाया है। राजेश गौरी

किससे पैमाने वफ़ा बाँध रही है बुलबुल,कल न पहचान सकेगी गुल-ए-तर की सूरत।

प्रेम , प्यास, प्रयास की अपनी जिद होती हैंऔर अपने ही रास्ते

जब किस्मत बदलती है तो,गैरों से ज्यादा अपनों की जलती हैं।

चढ़ते सूरज के पुजारी तो लाखों हैं 'फ़राज़'डूबते वक्त हमने सूरज को भी तन्हा देखा ~ अहमद फ़राज़

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