बहुत से पति पत्नी सिर्फ इसलिए साथ रहते हैं क्योंकि वो पति पत्नी हैं... एक सामाजिक बंधन है सात फेरे लिए है उन तमाम संस्कारों को पूरा किया है जो शादी के लिए जरूरी हैं... अब यहां प्रेम है या नहीं.... इसकी कोई गारंटी नहीं....

जान गया वो हमें दर्द में भी मुस्कुराने की आदत है,इसलिए वो रोज़ नया दुःख देता है मेरी ख़ुशी के लिए।

किसी अकेली शाम की चुपी मेंगीत पुराने गा के देखो…

दर्द नहीं, "दवा" बनिये….!!आप बशर रहिए, ना खुदा बनिये..!!(बशर- इंसान)

दुख का प्रतीकशायद रोना नहींमौन हो जाना है !!!

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