शहर जाकर बस गया हर शख्स पैसे के लिए , ख्वाहिशों ने मेरा पूरा गाँव खाली कर दिया ..!!

तुम्हारी नोजरिंग पर कविता लिखने बैठता हूं तो कलम टूट जाती है.

क्या फायदा इतनी बड़ी दुनिया का जब कोई घुमाने नही ले जा रहा है...

किस्मत का नहीं साहबसब मेहनत का खेल है!!

स्वार्थ को इतनी छूट देना सही नहीं कि वह विवेक को ही खा जाए।

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