लड़कियाँ खिलौना नहीं होती जनाब,पिता तो यूँ ही प्यार से गुड़िया कहते है..

बेकार लगनें लगते हैं मोती कभी कभार… पत्थर से भी इश्क़ हो सकता है इंसान को…!!

ख़बर नहीं मुझको ये कौन सा दर्जाएइश्क़ है,कि लफ़्ज़ सब मेरे हैं और ज़िक्र बस तुम्हारा है।

इक वक़्त था ,हम थे , तुम थे और बातें थीं,इक वक्त है ,हम हैं , तुम हो और यादें हैं…!!

वह पथ क्यापथिक कुशलता क्याजिस पथ पर बिखरे शूल न होंनाविक की धैर्य परीक्षा क्याजब धाराएँ प्रतिकूल न हों ~ जयशंकर प्रसाद

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