किरदार पे अगर बात आई तो याद रखनाबेरहम इंसान के साथ गालियों में PHD करके बैठा हूं
जिंदगी पर भरोशा कीजिए जनाबभरोरों पर जिंदगी नहीं…!!
मालिक करने वजूद ए ख़ाक चला है दोस्तजिस्म की जिंदा कल जिसकी हम रूह थे।
लाचार है बीमार है सही से चल नहीं सकता,एक गरीब बिना मेहनत किये पल नहीं सकता,और जो खुद कांटे हैं उन्हें तक़दीर सुख भेजती है,वहीं मुफलिसी उम्मीद लिए सड़कों पर फूल बेचती है..!!