मैं अपनी हर रात बस यूँ गुज़ार लेता हूँ , तुम्हारी यादों से चंद शब्द उधार लेता हूँ !!

पहाड़ तोड़ने का साहस तो हर इंसान में है, पर वो डरता है "कामयाबी" के पहले पागल घोषित किए जाने से।

वो नहीं रुकीमैंने आंसू भी दांव पर लगा के देखे…!!

किसी गरीब से ये बड़े शहर के लोगपैसे देकर बहुत कुछ छीन लेते है….!!

कुछ ज़ख़्म भी ख़ामोश कर दिये जाते हैं ‘लोग क्या कहेंगे’ ये कहकरअपने ही उनका गला घोट जाते हैं

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