घर वाले जब भी कहते हैं कि भाड़ में जाओ तो मैं चुपचाप आकर फेसबुक पर बैठ जाता हूँ.

यूं तो आदत नहीं मुड़कर देखने की,पर तुम्हे देखा तो ऐसा लगा कि एकबार और देख लूं

"नजरों का खेल था साहब" "वो चुरा ना सके हम हटा ना सके"

"क्या कशिश थी आप की आँखों में" "आप को देखा और आप के हो गए"❤️

जाने वाले ने सिखाया है, आने वाले को औकात में रखना…!!

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