नन्हें-नन्हें पाँव थे फिर भी खड़ा हो गया , एक भाई अपनी बहन के लिए माँ जितना बड़ा हो गया ।।

एक उम्र जी है मैंने तकलीफों में, अब जो तकलीफ ना हो तो तकलीफ होती है…!!

पलकों से रास्ते के कांटे हटा देंगेफूल तो क्या हम अपना दिल बिछा देंगेटूटने न देंगे हम इस प्यार को कभीबदले में हम खुद को मिटा देंगे 🌶

गरीबी ही सटीक है मेरे लिए,फालतू लोग आस-पास फटकते भी नहीं फिर ……

चाय में अपना भी एक हुनर हैजो पास नही होता उसको भीखींच लाती है यादों मेंअपने साथ हर शाम

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