हाफ़िज़ ए खुदा परे हट जाये मर्ज़ तेरे बूते का है हि नहींसाकि के मयखाने के सिवाग़म की कोई दवा नहीं होती ।।

अब आग माचिस से नहींलोगों की बातों से लगती है…!!

हर रात तुम्हें भूल जानें की ख्वाहिश से सोती हूं,हर सुबह फिर एक बार तेरे हो जानें के ख़्वाब लिए उठती हूं!

बुरे वक्त में कंधें पर रखा हुआ हाथ…कामयाबी पर तालियों से ज्यादा कीमती होता है..!!

स्वार्थ से ज्यादा ताकतवर इस दुनिया में कुछ नहींदो लोग जो एक दूसरे से नफ़रत में हैस्वार्थ उन्हें बांधे रखने का एक मात्र जरिया है!!

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