डूबी है मेरी उंगलियां मेरे ही खून मैं,ये काँच के टुकड़ो पर भरोसे की सजा है !!

आज फिर लौट आया बिना मांगें ,मैं तेरे दर से…!.तुझे बस देख लेता हूँ तो ख्वाहिशें ,खत्म हो जातीं हैं…!!

बुद्धि तो सबके पास होती है लेकिन चालाकी, करनी है या ईमानदारी ये तो संस्कार पर निर्भर करता है ..!!

बड़ी मुद्दतों के बाद लगा कोई मिला है मुझेपर ये तो ख़्वाब था ख़्वाब से गिला है मुझे.। -नेहा यादव

शुरुआत तो सब अच्छा ही करते हैंमसला तो आखिर तक चलने का है

Translate »