तुमसा कोई प्यारा,कोई मासूम नही है,क्या चीज हो तुम, खुद तुमको मालूम नही है

आज फिर जीने की तमन्ना है,आज फिर ' मरने' का इरादा है

पढ़ तो लेते है सब मुझे अच्छे से बस समझते है अपने नज़रिए से..!

इतने हिस्सों में बँट गए है हम .. जैसे अंदर से कट गए है हम … !!

जिन्हें तकदीर रुलाना चाहे ,उन्हें बेक़दरों से इश्क़ हो जाता है.

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