✯||तुम्हे साढ़ी बिंदी में देख मेरा मुंह उतर जानाठीक वैसा हैं जैसे किसी महंगे ख्याव का टूटकरबिखर जाना…||✯

जिएँ तो अपने बग़ीचे में गुल-मुहर के तलेमरें तो ग़ैर की गलियों में गुल-मुहर के लिए दुष्यंत कुमार

दिल से फसाते है लोगऔर दिमक से लूट लेते हैं…..!!

वो इसलिएनहीं आती हैमेरे साथउसके मन में हैमेरे लिएविचित्र बात..!!हम जोलगाते हैंनए-नए ट्वीट पर पिक..!!उन्हें देखकर हीबदल गएउसके हालात..!!

वक़्त चाहे कितना भी बदल जाए ,..पर चाय से मोहब्बत नहीं बदलेगी…!!

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