उबाऊ से दिन, अज्ञात भविष्य और अनियमित नींद, दिन बीतते जाते हैं और कुछ भी नया नहीं होता…!!!

मैं "हिंदी" का "आलिंगन" हूँवो "उर्दू" में "आग़ोश"उसको मेरे "बाजुओं" में सुकूँन है,मैं उसकी "बाहों" में मदहोश…

प्रेम में पागल हो जानाकिसी हद तक ठीक हैबेवकूफ बनना बिलकुल ठीक नहीं है। ~दिनकर

जितना कम सामान रहेगा उतना सफ़र आसान रहेगा! ~गोपालदास नीरज

मंज़िल पहुंचने के बाद पता चला की.."मंज़िल से अच्छा तो सफर होता है"…!!

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