बादलों को गुरुर था कि वो उच्चाई पे है,जब बारिश हुई तो उसे ज़मीन की मिट्टी ही रास आयी।

अपनी उम्मीद हमेशा ख़ुदा से रखो,इंसान कब बदल जाए कोई भरोसा नही ॥

जाना पहले तय कर लेते हैं,लोग विदा बाद में लेते हैं.

कल रात तुम्हें ख़्वाब में गले लगाया था, आज मेरे सभी दोस्त मेरी महक का राज़ पूछ रहे हैं…

ज़िंदगी की कुछ कमियां,,सिर्फ़ मजबूर नहीं,,मजबूत भी बनाती है। ~ कीर्ति चन्द्रा

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