लहज़े में उद्दंडता, खून में उबाल,जुबां पर ज़हर, अक्ल कम थी,आयी जब ज़िम्मेदारी तोमुंहपर झूठी मुस्कान और आंखे नम थी

पहले कैशलेस इंडिया फिर जॉबलेस इंडियाअब आपके सामने पेश है ब्रेनलेस इंडिया

हमें अपने जीवन से जुड़े अहम फैसले खुद लेने चाहिए,ताकी बाद में हमें उसका अफ़सोस ना हो।

दरिया हो या पहाड़ हो टकराना चाहिए जब तक न साँस टूटे जिए जाना चाहिए

जिंदगी का खेल भी कुछ कबड्डी के खेल जैसा ही है ,सफलता की लाइन टच करते ही लोग आपके पैर खींचने लग जाते हैं ...

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