बीते मीठे लम्हों का है जो आसराहसरतें खामोश ठहरा ज़ज्बातो का दायरातेरी भीनी आंखों में खो जाए मन मेरातुझसे ही जाने क्यूँ  मेरा है ऐसा राब़्ताचादर की सिलवटें में है जो थोड़े फ़ासलेतेरे पास ना होने का करे हर पल...

भागते बचपन में भी थे भागते आज भी हैं , बस्ता वही है बस अंदर सामान बदल गया है !!

मैं क्या बताऊँ कैसी परेशानियों में हूँ, काग़ज़ की एक नाव हूँ और पानियों में हूँ.... ~ भारत भूषण पन्त

जब से कुत्तों को पता चला है कि अब 14 नहीं, केवल एक ही इंजेक्शन लगता है,साले काटते कम है दौड़ाते ज्यादा है

ताकत लोगों को जोड़ने से बनती है, उनको खिलाफ़ करने से नहीं....

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