"जिस दिन आपने ये सीख लिया की सीखते कैसे है, फिर आप कुछ भी जीत सकते है II"

नशा दौलत का नहीं कामयाबी का रखो ,ज़िद मोहब्बत की नहीं मंजिल की रखो ।

अब तो हमारे जिक़्र पर न मोड़िए गा मुंहअब तो हमारे शेर भी मशहूर होने लगें है

मेहमान की तरह घर से आते जातेबेघर हो गए हैं, कमाते कमाते….!

लड़खड़ाये कदम तो गिरे उनकी बाँहों मे , आखिर हमारा पीना ही आज हमारे काम आया

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