एक तेरा दीदार मेरे सारे गमो को भुला देता है…. मेरी जिंदगी को जिंदगी बना देता है….!!

जिन्हें महसूस इंसानों के रंंजो-गम नहींहोते…वो इंसान भी पत्थरों से कम नहीं होते…!!!

उम्र कटी दो अल्फाज में,एक आस में दूसरा काश में….

शाम से आँख में नमी सी हैआज फिर आप की कमी सी है ~गुलज़ार

विरानी खुद में थी,बेरंग दुनियां को लिखते रहे…

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