तपस्या अगर पार्वती की थी तो प्रतीक्षा शिव की भी रही होगी

मैंनेगुलाब कीमौन शोभा को देखा !उससे विनती कीतुम अपनीअनिमेष सुषमा कोशुभ्र गहराइयों का रहस्यमेरे मन की आंखों मेंखोलो !मैं अवाक् रह गया !वह सजीव प्रेम था !मैंने सूंघा,वह उन्मुक्त प्रेम था !मेरा हृदयअसीम माधुर्य से भर गया !

हम खुद अकेले रह गये ,सबका साथ देते देते।

तह बह तह जमती चली जाती है सन्नाटों की गर्दहाल-ए-दिल सब देखते हैं पूछता कोई नहीं

आदमी मुर्दे को पूजता है,अस्थियां पूजी जाती हैं।राख पूजी जाती है।लाशें पूजी जाती है।तिरस्कार होता है।और जीवंत का आदमी अद्भुत है।

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